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इस प्लेन का एक पहिया टूटकर नीचे गिर गया, यात्रियो की जान जाते-जाते बची, देखे वीडियो

दोस्तों, हाल ही में 6 मई 2021 की शाम को एक ऐसी घटना घटी है, जिसे जानकर लोग हैरान ही रह गए। प्लेन के टेक ऑफ के दौरान एक पहिया खुलकर अलग हो गया। सबसे ज्यादा मुश्किल है थी कि प्लेन को लैंड कैसे कराया जाए। बिना पहिया के एरोप्लेन को लैंड करवाना यानी की मौत को खुलेआम बुलाना था। चलिए विस्तार से बताते हैं:-

दोस्तों महाराष्ट्र में एक मरीज लंग्स में हुए इंफेक्शन से जूझ रहा था। कहीं डॉक्टर सुने कोशिश की लेकिन सिचुएशन बहुत गंभीर हो चुकी थी। इस मरीज को सर्जरी के लिए प्लेन से मुंबई से विदेश में ले जाने के लिए कहा गया। इस मरीज के साथ तीन अन्य लोग भी साथ में गए। इस प्लेन को कैप्टन केसरी सिंह उड़ाने वाले थे। जोकि बहुत एक्सपीरियंस वाले कैप्टन है।

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यह प्लेन एयर एंबुलेंस थी, जिस कारण से इस प्लेन का साइज छोटा था। बाहर जाने से पहले केसरी सिंह ने नागपुर में प्लेन को लैंड करवाया। नागपुर में इस प्लेन में फ्यूल भरा गया। अभी तक तो सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन कुछ देर में प्लेन में एक समस्या खड़ी हो गई जिसके बारे में पायलट का कोई अंदाजा नहीं था। पायलट के पास कंट्रोल रूम का फोन आया उन्होंने कहा कि प्लेन का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया है।

नागपुर में ही यह इससे नीचे टूट कर गिर गया था। जिसके बारे में पायलट को कोई अंदाजा नहीं था। फिर नागपुर में खोजबीन किया गया तो प्लेन का एक पहिया गिरा हुआ मिला। प्लेन में पहिया नहीं होने की वजह से इस प्लेन को लैंड भी नहीं किया जा सकता। लैंडिंग के दौरान कुछ भी हो सकता था। इस प्लेन के आगे का पहिया बिल्कुल ठीक-ठाक था।

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इस प्लेन को ऐसे ही लैंड करवाना पड़ा जिस वजह से नोजवेल में रगड़ आ गई थी। ऐसे में प्लेन को कंट्रोल करने में बहुत बड़ा खतरा होता है। और अगर ऐसे में अगर खुलकर लीकेज हो जाए तो यह खतरा और भी अधिक बढ़ सकता है। यह रगड़ खाने की वजह से इतनी हिट जनरेट होती है कि फ्यूल को मिलते हैं यह पूरा आग पकड़ लेता है। इस प्लान को लेकर पायलट एयरपोर्ट के चारों तरफ घूम रहे थे। एयरप्लेन के टैंक में भरा हुआ एक्सट्रा फ्यूल खत्म हो जाए।

पर यहां पर सबसे बड़ी समस्या यह थी कि इस प्लेन में एक मरीज था। जो ऑक्सीजन के सहारे जीवित था। जब फ्यूल खत्म हो गया तब पायलट ने सोचा कि अब लैंड करवाने का वक्त आ गया है। लैंडिंग के लिए एयरपोर्ट पर भी सब कुछ तैयारी हो चुकी थी। ऐसे ही लैंडिंग के समय सबसे ज्यादा ध्यान रखा जाता है की स्पीड उसका कम हो। धीमी स्पीड में पायलट धीरे-धीरे प्लेन को नीचे लाते गए।

खुशकिस्मती से प्लेन आराम से नीचे लैंड हो गया और सबको सांस में सांस आया। जिसके बाद यह न्यूज़ ब्रेकिंग न्यूज़ की तरह हर जगह फैल गई। इस तरह का हादसा इमरजेंसी पेशेंट के साथ होना अपने आप में बहुत बड़ा दुर्भाग्य था। सब कुछ अच्छी तरह से हो गया लेकिन इसके बावजूद एक सवाल पीछे छूट गया। सवाल की प्लेन में से पहिया टूटकर कैसे गिरा। अगर सारा काम अच्छी तरह से होता तो इस तरह की सिचुएशन नहीं आती।