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प्राचीन भारत मे ऐसे की जाती थी अपराधी को टोर्चर, जानकर रूह कांप जाएगा

हैलो दोस्तों, आपने बहुत सी फिल्मों में देखा होगा कि जब कोई अपराधी को पकड़ा जाता है तो उसे जानकारी उगलवाने के लिए बहुत टॉर्चर किया जाता है। फिल्मों में तो ना जाने टॉर्चर करने के कितने सारे तरीकों को दिखाया जाता है। जिनमें से कुछ बेहद ही अजीबोगरीब होते हैं। आज हम आपको प्राचीन दुनिया में किए जाने वाले टॉर्चर के बारे में बताएंगे जिसे देखकर आप सोचेंगे कि इतना भयंकर टॉर्चर मिलने से अच्छा था कि मौत जल्द हो जाए। तो चलिए शुरू करते हैं:-

प्राचीन दुनिया में अपराधी को एक मेज से बांधकर उसके तलवे को बकरे से तब तक चटवाया जाता था, जब तक कि उसे हंसते-हंसते मौत ना हो जाए।

प्राचीन दुनिया में अपराधी को बांस के छोटे छोटे पौघो से बांध दिया जाता था ताकि जब बांस का पौधा बड़ा हो तो उसे चीरते हुए बड़ा हो जाए।

दोस्तों सबसे पहले हम आपको बता दें कि टॉर्चर शब्द का अर्थ होता है प्रताड़ना। प्रताड़ना के दो तरीके होते हैं यह पॉजिटिव दूसरा नेगेटिव। अगर आप किसी बेगुनाह व्यक्ति को टॉर्चर कर रहे हैं तो यह बिल्कुल गलत है।

दुनिया के हर देश में टॉर्चर को अपराध के रूप में देखा जाता है। लेकिन दुनिया के हर कानून लगभग इस बात को इजाजत देता है कि एक अपराधी से उसके अंदर के बातों को पता लगाने के लिए उसे टॉर्चर किया जाए।

यही कारण है कि प्राचीन भारत में भी अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरीकों से टॉर्चर किया जाता था। हालांकि आजकल के टॉर्चर करने के तरीके ज्यादा दर्दनाक नहीं होते।

लेकिन प्राचीन काल में टॉर्चर करने के तरीके इतना दर्दनाक होता था कि अधिकतर मामलों में अपराधी की मौत हो जाती थी। आज हम आपको प्राचीन काल में सबसे खतरनाक टॉर्चर के बारे में बताएंगे।

SPIK IRON BOX:- इस टॉर्चर में एक लोहे का बॉक्स होता है जो कांटों से भरा होता है। इस मशीन का इस्तेमाल अपराधियों को टॉर्चर करने के लिए आज से लगभग 300 साल पहले किया जाता था। जब किसी अपराधी को पकड़ा जाता था तो उस अपराधी को इस बॉक्स में कैद कर दिया जाता था। बॉक्स के अंदर बने कांटे अपराधी के चमड़े में छोटे-छोटे छेद कर देते थे।

इस बॉक्स में बंद करने के बाद अपराधी की हालत ऐसी हो जाती थी कि ना तो वह ठीक तरह से खड़ा हो पाता था और ना ही बैठ सकता था। अगर अपराधी इस बॉक्स के अंदर बैठने की कोशिश करेगा तो बॉक्स के अंदर बने कांटे हैं अपराधी के शरीर को चीर देंगे। इस बॉक्स में जाने के बाद अपराधी के शरीर से धीरे-धीरे खून बहने लगता था। और अंत में अपराधी की मौत हो जाती थी।

इस बॉक्स में जाने से कई बार ऐसा होता था कि अपराधी को नींद भी सताने लगती थी लेकिन वह मजबूरी की वजह से सो भी नहीं पाता। इसके अंदर सोने का मतलब था दोबारा कभी ना जगने वाली नींद।

LAUGHING DEATH:- दोस्तो, आप तो जानते हैं कि हंसना किसी भी व्यक्ति के लिए अच्छा होता है। लेकिन वही हंसी है जब ज्यादा हो जाए तो इंसान के मौत का कारण बन सकती है।

प्राचीन में इस बात को लोग बहुत अच्छी तरह से जानते थे। यही कारण है कि लोग इस हंसी का इस्तेमाल अपराधी के टॉर्चर के रूप में करने लगे। उस वक्त जब किसी अपराधी को पकड़ा जाता था तो टेबल के ऊपर कस कर बांध दिया जाता था।

अपराधी को बांधने के बाद उसके तलवे पर नमक का सॉल्यूशन लगाया जाता था। उसके बाद एक बकरे को कमरे में लाया जाता था। अपराधी के तलवे को बकरे से खूब चटवाया जाता था। शुरुआत में तो अपराधी को खूब मजा आता था।

यह सिलसिला कुछ घंटों तक चलने के बाद अपराधी की मौत हो जाती थी। दोस्तों आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारे पैर के तलवे के पास 20 लाख से ज्यादा नब्ज आकर खत्म होते हैं। यही वजह है कि हमारे पल्ले को जब कोई छूता है तो हमारा शरीर सिहर उठता है।

आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि प्राचीन समय में अपराधियों को टॉर्चर करने का अंदाजा काफी अजीबोगरीब था।

BAMBOO TORCHER:- दोस्तो सबसे पहले हम आपको बता दें कि बांस का पौधा एक ऐसा पौधा है जो एक रात में कभी-कभी 2 फीट तक बढ़ जाता है। प्राचीन में इस बात को बखूबी जानते थे। यही यही कारण है कि प्राचीन में लोग अपराधियों को टॉर्चर करने में बांस का पौधा इस्तेमाल करने लगे थे।

प्राचीन दुनिया में जगह किसी अपराधी को पकड़ा जाता था तो उस अपराधी को ऐसे बांस के पौधों के पास ले जाते थे जो बेहद ही छोटा होता था। अपराधी को बांस के पौधों से बांध दिया जाता था क्योंकि बांस का पौधा कभी-कभी एक रात में ही 2 फीट बढ़ जाता था।

अपराधी को सजा देने वाले लोग बांस के सीने को काटकर चाकू की तरह नुकीला बना देते थे। बांस का पौधा जब बड़ा होता था, तो अपराधी के शरीर को चीरते हुए आगे बढ़ता था। किसी अपराधी को टॉर्चर करने का तरीका यह बहुत ही भयंकर होता था।

TORTURE BY ELEPHANT:- टॉर्चर करने का यात्री का प्राचीन भारत में बहुत भयंकर था। हाथी को हमारे धरती पर मौजूद सबसे भारी जानवर माना जाता है। जिसका वजन 4000 से 5000 किलो तक पहुंच जाता है। प्राचीन भारत में हाथी के वजन का इस्तेमाल अपराधियों को टॉर्चर करने में किया जाने लगा था।

प्राचीन भारत में जब किसी अपराधी को पकड़ा जाता था तो उसे हाथ पैर बांधकर जमीन पर लेटा दिया जाता था। उसके बाद ऐसे हाथी को लेकर आया जाता था जिससे लंबे समय से ट्रेनिंग दी जाती थी। हाथी को इस बात की ट्रेनिंग दी जाती थी कि अपराधी को जान नहीं लेनी है बल्कि उसकी जान धीरे-धीरे निकालनी है।

लंबे समय की ट्रेनिंग देने के बाद हाथी इस काम को बड़े अच्छे तरीके से अंजाम देता था। अपराधी को जमीन पर लगा देने के बाद हाथी को वहां पर लाया जाता था। उसके बाद हाथी अपराधी के हाथ पैर को धीरे धीरे कुचलता था। हाथी इस बात का ध्यान रखता था कि अपराधी के हाथ पैर का चूरमा बनाना है लेकिन उसका जान नहीं निकालनी है।

हाथी अपना पूरा वर्जन अपराधी के हाथ पैर के नाजुक अंग पर पटक देता था। अधिकतर ऐसे मामलों में अपराधी की मौत हो जाती थी। यह टॉर्चर करने का तरीका प्राचीन भारत में इस्तेमाल किया जाता था।