Home रोचक तथ्य तिरुपति बालाजी के कुछ रहस्य बाते जिसे NASA भी नहीं समझ पाई

तिरुपति बालाजी के कुछ रहस्य बाते जिसे NASA भी नहीं समझ पाई

भारत को परम्पराओ का देश कहा जाता हैं जहां हर धर्म के लोग बड़े प्यार से रहते हैं चाहे मंदिर हो, मस्जिद हो या फिर मकवरा आपको जैसी चिंजे भारत मे देखने को मिलेगी जहां पूरे दुनिया मे कही नहीं। आज मैं आपको भारत मे मौजूद सैंकड़ों साल पुरानी एक ऐसे रहस्मय मंदिर के बारे मे बताएगे जहां कोई मूर्ति नहीं बल्कि खुद भगवान विराजमान हैं तो चलिये शुरू करते हैं :-

TIRUPATI BALAJI TEMPLE :- नाम तो अपने कई बार सुना होगा लेकिन इस मांसदिर के रहस्य के बारे मे आप नहीं जानते होगे। यह मंदिर दक्षिण भारत के राज्य आन्ध्रप्रदेश के चितुर जिले मे बना हुआ हैं। यह सबसे प्रसिद्ध मंदिर मे से एक हैं। इस मंदिर की खास बात यह हैं की मंदिर की गर्भ मे मूर्ति स्थापित हैं वो किसी इंसानों के द्वारा बनाई गयी मूर्ति नहीं हैं आपको जानकार हैरानी होगी की वहाँ खुद भगवान विराजमान हैं। भले ही वह पत्थर की मूर्ति हैं लेकिन जब आप खुद उनके दर्शन करगे तो आपको यकीन हो जाएगा की वो कोई आम मूर्ति नहीं हैं बल्कि वो जीवित भगवान हैं।

तिरुपति बालाजी मंदिर मे दर्शन करने वाले लोगों और वहाँ के पुजारिओ का कहना हैं की वहाँ के बैनटेसवार भगवान की मूर्ति से हर वक्त समुन्द्र मे उठी लहरों के जैसा आवाज आती हैं। भगतवन की मूर्ति मे आप कान लगाकर सुनेगे तो आपको ऐसा लगेगा की आप किसी समुन्द्र के किनारे खड़े हो।

वहाँ बाल दान करने की परंपरा हैं। आपको जानकार हैरानी होगी की हर रोज यहाँ 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालु अपने बाल को दान करते हैं। इसके अलावा यहाँ पैसा, सोना इत्यादि भी दान होती हैं इसलिए यह दुनिया के सबसे अमीर मंदिर हैं।

आपको यह जानकार हैरानी होगी की जब कोरोना वायरस की वजय से जब पूरी दुनिया मे लॉकडाउन लगा हुआ था उस वक्त तिरुपति बालाजी ट्रस्ट के फिक्स डिपॉजिट मे इतना पैसा जमा था की उसके व्याज से ही वहाँ के 3000 से ज्यादा कर्मचारियो को तीन महीने से भी अधिक सैलरी, पैंसन एक साथ दे दी गयी थी। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओ का कहाँ हयाइन की यहाँ मनात मांगने से भगवान उनकी हर मनोकामनाएँ पूरी करते हैं।

जब आप कभी तिरुपति बालाजी मंदिर जाएगे तो आपको वहाँ के मुख्य दरवाजे केर दाई ओर एक छड़ी राखी हुई दिखाई देगी यह वही छड़ी है जिससे बचपन मे तुरुपति बालाजी के माता जी ने उनकी पिटाई की थी पिटाई की वजन से उनके ठूडी पर चोट लग गई थी यही कारण हैं की आज तक हर शुक्रवार को चन्दन का लेप उनके ठूडी पर लगाया जाता हैं ताकि उनका घाव भर सके। आपको यह जानकार हैरानी की तिरुपति बालाजी के आराम के लिए पूरे मंदिर का वातावरन की ठंडा रखा जाता हैं लेकिन फिर मे उन्हे गर्मी लगती हैं उनका माथा और पीठ हमेशा पसीने से भिंगा रहता हैं।

मंदिर के पुजारी वक्त-वक्त पर उनके पसीने को पोछते रहते हैं। जितना अनोखा यह मंदिर हैं उतने ही अनोखे ढंग से भगवान का शृंगार किया जाता हैं। इस मंदिर मे हर रोज 3 लाख से भी ज्यादा देसी घी के लड्डू बनाए जाते हैं। यह लड्डू तिरुपति बालाजी के गुफ्त रसोई मे बनाया जाता हैं। उस रसोई को पुतु के नाम से जाना जाता हैं।

एक और हैरानी के बात यह हैं की यहाँ पर मंदिर केआर गर्भ मे एक दीपक जलता हैं यह दीपका सैकड़ो साल से जलता आ रहा हैं जिसमे न तो तेल हैं औए ना हीं घी।