Home भक्ति रामायण होने का 20 सबूत… रामसेतु, रावण का महल, पंचवटी, अशोक वाटिका

रामायण होने का 20 सबूत… रामसेतु, रावण का महल, पंचवटी, अशोक वाटिका

हैलो दोस्तों, आप तो जानते हैं कि राम और रामायण हमेशा से आस्था का केंद्र रहे हैं। रामायण के अनुसार भगवान राम ने रावण का वध करके धर्म की स्थापना की थी। लेकिन कई सारे लोग भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठाते हैं। आज हम आपको भगवान श्री राम और रामायण से जुड़े कुछ प्रमाण देने वाले हैं। जो आज भी जीवित अवस्था में पाए गए हैं। तो चलिए शुरू करते हैं:-

सांप के सिर की जैसी गुफा: रावण जब सीता का अपहरण किया था तो उन्होंने इसी गुफा में सीता जी को रखा था। इस गुफा का आकार कोबरा सांप के सिर की तरह फैला हुआ है। गुफा के चारों ओर की नक्काशी रामायण की प्रमाण है।

हनुमान गढ़ी: जिस स्थान पर भगवान हनुमान श्री राम की प्रतीक्षा करते थे उसे हनुमानगढ़ी कहते हैं। रामायण में भी इसका उल्लेख है कि यहां पर भगवान हनुमान का एक मंदिर है। जो हनुमानगढ़ी के नाम से प्रसिद्ध है।

हनुमान जी के पद चिन्ह: रामायण में ऐसी वर्णन किया गया है कि जब भगवान हनुमान ने सीता को खोजने के लिए समुद्र पार किया तो उन्होंने एक विशाल रूप धारण किया था। आज भी उस स्थान पर श्रीलंका में भगवान हनुमान के पद चिन्ह मौजूद हैं।

रामसेतु: रामसेतु भी रामायण और भगवान श्री राम के अस्तित्व का प्रमाण है। रामायण में श्रीलंका के इस पुल के बारे में लिखा गया है। यह पुल पानी में तैरते हुए पत्थर से बना था। जो आज भी समुद्र तल पर मौजूद है।

तैरता हुआ पत्थर: समुद्र पर पुल बनाने के लिए ऐसी पत्थरों की आवश्यकता थी जो पानी में तैर सके। नल और नील को श्राप मिला था, जिसके कारण जो भी वह पत्थर को छूते वह तैरने लगता था। इन्हीं पत्थरों पर राम लिखकर उसका पुल बनाया गया था। सुनामी के बाद इनमें से कुछ चटाने टूट कर गिर गई। शोधकर्ताओं के जांच के बाद पता चला कि यह पत्थर उसी समय का है जब रामायण हुई थी।

द्रोणागिरी पर्वत: लक्ष्मण और मेघनाथ के युद्ध के बाद जब लक्ष्मण बेहोश हो गए थे, तब भगवान हनुमान संजीवनी को लेने द्रोणागिरी पर्वत पर गए थे। संजीवनी की पहचान ना होने के कारण उन्होंने पूरे पहाड़ को उठा लिया था। यह पहाड़ आज भी वहां मौजूद है।

संजीवनी बूटी: श्रीलंका में संजीवनी बूटी के दुर्लभ अंश पाए गए हैं जहां पर लक्ष्मण बेहोश हो गए थे। श्रीलंका में जड़ी बूटी का पाया जाना भगवान श्रीराम का अस्तित्व बताता है।

अशोक वाटिका: सीता के अपहरण के बाद रावण श्री लंका ले गया तो माता सीता ने लंका में रहने से मना कर दिया। तब रावण ने माता सीता को अशोक वाटिका में रखा। जहां वह एक पेड़ के नीचे बैठी थी। अब उस जगह को एलिया के नाम से जाना जाता है। यह जगह आज भी मौजूद है।

लेपाक्ष्य मंदिर: सीता हरण के बाद रावण हवाई मार्ग से उन्हें लंका ले जा रहा था। जटायु ने उन्हें रोकने के लिए रावण से युद्ध किया। जहां पर जटायु गिरा था वहां लेपाक्ष्य मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर आज भी मौजूद है।

विशालकाय हाथी: रामायण के सुंदरकांड में लिखा है कि विशाल हाथी लंका के रखवाली के लिए रखे गए थे। जैसे भगवान हनुमान ने एक ही प्रहार से बेहोश कर दिया था। शोधकर्ताओं के इन्हीं विशाल हाथियों के जीवाश्म मिले हैं।

कोंडा ककू गढ़ा: भगवान हनुमान ने जो श्री लंका को जलाया तो रावण भयभीत हो गया। माता सीता को अशोक वाटिका से हटाकर कोंडा ककू गढ़ा में रखा था। यहां कई सारी ऐसी गुफाएं मिली है जो रावण के महल तक जाती हैं। यह रामायण के घटना का एक जीवित सबूत है।

रावण का महल: दोस्तों श्रीलंका में एक महल मिला है जिसे रावण का महल कहा जाता है। रावण का यह महल आज भी श्रीलंका में मौजूद है।

कलानिया: राम और रावण के युद्ध के बाद विभीषण को लंका का राजा बनाया गया था। जिसके बाद विभीषण ने कलानिया में एक महल बनवाया था। जो कैले नदी के तट पर स्थित था। शोधकर्ताओं के महल का अवशेष इस नदी के किनारे मिले हैं।

लंका के अवशेष: हनुमान जी ने अपनी पूंछ से पूरी लंका को जला दी थी। जिसके अवशेष आज भी लंका से प्राप्त हुई है। यहां के स्थानों की मिट्टी आज भी काली है।

द्विराम पोला: रामायण में माता सीता ने अपनी पवित्रता को साबित करने के लिए जहां पर अग्नि परीक्षा दी थी, वह ब्रिछ अभी भी वहां पर मौजूद है। जिसके नीचे माता सीता ने अग्नि परीक्षा दी थी। उस स्थान को द्विराम पोला कहा जाता है।

रामलिंगम: रावण के हत्या के बाद राम ब्राह्मण के हत्या के दोषी थे। उन्हें ब्राह्मण के हत्या के बाद भगवान शिव की आराधना की। भगवान शिव ने उनसे 4 शिवलिंग की मांग की। सीता जी के द्वारा एक शिवलिंग बनाया गया जो रेत से बनाया गया था। हनुमान जी कैलाश पर्वत से दो शिवलिंग लाए थे। भगवान राम ने अपने हाथों से एक शिवलिंग बनाया। जो आज भी मंदिर में मौजूद हैं।

जानकी मंदिर: रामायण में सीता के पिता जी का नाम जनक था। उन्हीं के नाम पर एक शहर का नाम जनकपुर पड़ा। साथ ही माता सीता को भी जानकी के नाम से जाना जाता है। उन्हीं के नाम पर मंदिर का नाम जानकी मंदिर रखा गया है।

पंचवटी: नासिक में अभी भी पंचवटी तपोवन है। जब राम सीता और लक्ष्मण वनवास के लिए अयोध्या छोड़ कर गए थे तो यही पर रहे थे। और साथ में यहीं पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा के ना काटे थे।

कोटेश्वर मंदिर: रावण भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था। भगवान शिव के इस मंदिर की स्थापना रावण ने की थी। यह दुनिया का ऐसा मंदिर है जहां पर भगवान शिव से ज्यादा रावण की प्रतिमा बनी है। इस मंदिर में रावण की आकृति और उसके 10 रूप को दर्शाती है।

गर्म पानी का कुआं: कोटेश्वर मंदिर के पास एक गर्म पानी का कुंड स्थापित है। इसका पानी गर्म है और यह रावण के द्वारा ही बनाया गया था। यह कुआं आज भी मौजूद है।