Home रोचक तथ्य प्राकृति भी अब बदला ले रही हैं दुबई से जानिए कैसे ….

प्राकृति भी अब बदला ले रही हैं दुबई से जानिए कैसे ….

कच्चे तेल के खजाने ने दुबई को इतना अधिक अमीर बना दिया हैं कि इसकी गिनती दुनिया के सबसे अमीर जगहो की होने लगी। लेकिन दुबई को मालूम हैं कि उसके अमीरी तभी तक हैं जब तक कच्चे तेल का भंडार हैं। दुबई ने पैसा बढ़ाने के लिए और भी विकल्प की खोज की हैं। उसने समुन्द्र मे पैर पसारना शुरू कर दिया हैं। आज दुबई ने समुन्द्र मे टूरिज़म के लिए ऐसे-ऐसे आइज़लैंड बनाए हैं जिसे देखकर पूरी दुनिया हैरान हैं। जिसे देखने के लिए बहुत सारे टूरिज़म हर साले यहाँ आते हैं।

यही आइलैंड मे से एक मैंन-मेड आइलैंड हैं, PALM JUMEIRAH. दुबई ने जो प्रकृति के साथ भयंकर छेड़खानी की हैं, अब प्रकृति भी दुबई से जवाब लेना शुरू कर दी हैं। आज हम आपको बताएँगे कि कैसे दुबई समुन्द्र को हरपना शुरू किया था। और किस तरह से समुन्द्र अपनी सारी जमीन वापस लेना शुरू कर दी हैं। तो चलिये शुरू करते हैं:-

आइलैंड बनाने की जरूरत क्यो पड़ी:- दुबई के पास जितना भी पैसा हैं उसका सोर्स सिर्फ कच्चा तेल ही हैं। लेकिन अब दुनियाँ से कच्चे तेल का भंडार धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा हैं। फिर से गरीब देश की गिनती के डर से दुबई ने सोचा कि दुबई को टूरिज़म स्पोर्ट बनाया जाये।

उसने अपने स्मून्द्री इलाको का इस्तेमाल करने का सोचा। समुन्द्र के बिचो-बीच उन्होने आइलैंड बनाने का सोचा। यह आइलैंड रेत और चट्टानों के आधार पर बनाया गया हैं। हिंदुस्तान के मध्यप्रदेश के छत्रपुर जिले के चट्टानों को इस्तेमाल किया गया, पाल्म आइलैंड को बनाने के लिए।

इन सारे पत्थरो की सबसे पहले कटाई हुई, इसके बाद मध्यप्रदेश से इसे गुजरात मे भेजा गया। गुजरात के बन्दरगाह से उन पत्थरो को दुबई पहुंचाया गया। ये सारे पत्थर ग्रेफ़ाइट के थे। दुबई खुद रेत के टीले पर बसा हुआ हैं। पाल्म आइलैंड को बनाने के लिए रेत की बहुत इस्तेमाल किया गया। किसके बाद पारस की खाड़ी से रेत को निकाला गया। फिर पहाड़ी इलाको से भी पत्थर को निकाला गया। जिसके बाद समुन्द्र के भीतर जमीन तैयार किया गया।

जिसके बाद पाल्म आइलैंड बनकर तैयार हो गया तो इंजीनियर सेटेलाइट के जरिये इसे देखते थे। इसके अलावा सैंकड़ों समुन्द्र के अंदर गोताखोर की टिम लगातार इस पर नजर रखते थे। कि द्वीत की जमीन कही से खिसक न जाये। 2003 मे यह द्वीप बनकर तैयार हो गया। ये द्वीप पूरी दुनियाँ के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं हैं। ऐसा मानव निर्मित द्वीप पूरी दुनियाँ मे काही पर भी नहीं हैं।

इसके बनावट को देखने के लिए लोगो को हैलिकोप्टर का सहारा लेते हैं। यहीं दुबई की कमाई के लिए नया जरिया बनता जा रहा हैं। यहाँ पर निकट ही 52 मंज़िला इमारत तैयार की गयी हैं, ताकि इस द्वीप का नजारा ठीक तरह से देखा जाये। इस आइलैंड पर बनी छोटे-से-छोटे फ्लैट की भी कीमत करोड़ो रुपए मे हैं।

लेकिन दुबई ने जो प्रकृति के साथ जो छेड़-छाड़ की हैं, उसका बुरा असर दिखना शुरू हो गया हैं। एक तो यहाँ का जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रहा हैं। दुनियाँ भर मे शहर समुन्द्र के सिने पर बहुत आइलैंड बनना शुरू कर दिया हैं। ऐसे मे दुनियाँ भर के जीव-जन्तु को जो समुन्द्र मे रहते हैं, उन्हे बहुत बड़ी चुनौती मिली हैं। कई सारे समुंदरी जीव विलुप्त के कगार पर पहुँच गए हैं।

मिट्टी और रेत डालकर समुन्द्र की छती पर जो जमीन तैयार की जा रही हैं उसकी बुनियाद बहुत कमजोर हैं। उसमे उतना ताकत नहीं हैं कि समुन्द्र के लहरों को रोका जाये। दुबई का पाल्म आइलैंड चाहे कितना भी जतन से क्यो न बनाया गया हो यह आइलैंड भी पानी मे डूबने के कगार पर हैं। यह आइलैंड हर साल 0.2 इंच के दर से डूब रहा हैं।