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अन्तरिक्ष मे भेजकर सैंकड़ों जानवर को ऐसे दी गयी बली, जानकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे

कुदरत ने हर किसी को कारीगरी से बनाया हैं, चाहे वो छोटा सा चींटी हो या विशालकाय हाथी। लेकिन कुदरत इंसान को बनाकर बहुत बड़ी गलती कर दी, क्यूकी आज इंसान कुदरत को ही निगल जाने की कोशिश मे लगा हुआ हैं। वही इंसान कुदरत को चकमा देकर चंद्रमा और मंगल को भी अपने मुट्ठी मे भरना चाहता हैं। इस कामयाबी के लिए हम इन्सानो ने इतने जीवो की बली दी हैं जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। आज सारे इन्सानो को अन्तरिक्ष मे पहुँचने वाला हर व्यक्ति का नामा तो याद हैं, लेकिन अन्तरिक्ष मे पहुंचले वाला पहला जानवर याद नहीं हैं। आज हम आपको उनही बदकिस्मत जानवर के दर्दनाक कहानी को बताएँगे।

आज एक बिजनेस मैन एलन मास्क अन्तरिक्ष मे इन्सानो को बसाने मे लगा हुआ हैं। सबसे पहले अन्तरिक्ष मे भेजकर जिसकी बली दी गयी वो थी लाइका नाम की एक कुतिया। साल 1950 की बात हैं जब इंसान अन्तरिक्ष को दूर से ही देखा करते थे। पहले वैज्ञानिको को नहीं मालूम था, कि कोई जीता-जागता जीव अन्तरिक्ष के बाहर सांस ले सकता हैं। इन्ही के बारे मे जानने के लिए रूस के सड़क से एक कुतिया उठाई, जिसका नाम था लाइका।

लाइका अन्तरिक्ष मे कदम रखने वाली सबसे पहली जीव थी। रूस के वैज्ञानिको का ये जानना था कि पृथ्वी के वातावरण के बाहर एक जीव जिंदा रह सकता हैं या नहीं। बिना जाने किसी इंसान को मरने के लिए अन्तरिक्ष मे नहीं भेज सकते थे, इसलिए उनलोगों ने 3 साल के अवारा कुतिया को उठाया। अन्तरिक्षयान को मात्र 4 सप्ताह मे ही तैयार किया, इस अन्तरिक्षयान के अंदर एक ऑक्सीज़न जेनेरेटर था, खाने-पीने की चीजे मौजूद थी। लाइका के अनुसार हर चीज मौजूद थी।

अन्तरिक्षयान पूरे रफ्तार से अन्तरिक्ष मे पहुँच गया। अंतरिक्षयान मे एक गलती की वजह से एयर क्राफ्ट उससे अलग नहीं हो पाया, उससे इतनी गर्मी निकाल रही थी कि अंतरिक्षयान पूरी तरह से गरम हो गया। टेम्परेचर लगातार बढ़ता जा रहा था, लाइका ने 3 घंटे तक उस भयंकर गर्मी को सहन किया, लेकिन लगातार टेम्परेचर बढ्ने के कारण लाइका की मौत हो गयी।

एक तरफ लाइका की तरफ-तरपकर लाइका की मौत हो गयी थी, दूसरी तरफ वैज्ञानिक यह सोचकर खुश थे कि उन्हे एक डेटा मिल गया था कि पृथ्वी के बाहर कोई जीव जिंदा रह सकता हैं। लाइका के मौत के बाद वो खराब अंतरिक्षयान 5 महीने तक पृथ्वी के ऊपर ही चक्कर काटता रहा। जैसे ही वो अंतरिक्षयान पृथ्वी पर उतरा वो जलकर राख़ हो गया। लाइका के मौत के बाद रूस के Government ने उसकी पुतला बनवाई।

लाइका के मौत के बाद भी वहाँ के वैज्ञानिको के सैकड़ो जानवर को अन्तरिक्ष मे भेजना जारी रखा। रूस की कामयाबी को देखकर अमेरिका कैसे पीछे रहता। उन्होने भी एक हैम नाम की एक चिंपाइंजी को अन्तरिक्ष मे भेजा। इस चिंपाइंजी को चिड़ियाँघर से खरीदा गया था, जिसे कई साल तक ट्रेनिंग दी गयी थी। उस समय वैज्ञानिको को यह जानना था कि वहाँ पर जाकर चल-फिर सकता हैं, अपने दिमाग का सही इस्तेमाल कर सकता हैं या नहीं।

चिंपाइंजी को अन्तरिक्ष मे भेज दिया गया। वहाँ जाकर पता चलता हैं कि उसमे लगा हुआ पैराशूट खराब हो गया हैं। उस कैपशुल की क्रेश हो जाती हैं। सभी को लगा की चिंपाइंजी का शरीर बहुत सारे टुकड़ो मे बट गया होगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जब कैपशुल को खोला गया तो वो बंदर वैसा-का-वैसा ही था, जीवित। सभी लोग उसे देखकर हैरान रह गए।