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इंसान इतना क्रूर हो सकता हैं, एक बेजुबान जानवर को दे दी फाँसी

हैलो दोस्तो, आपने फिल्में तो बहुत देखी होगी। कभी कभी कोई फिल्म में एक डिस्क्लेमर आता है कि इस में दिखाए गए जानवर को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं किसी जानवर को नुकसान पहुंचाया जाए तो पेटा वाले धर लेते हैं। नहीं तो मेनका गांधी भरता बना देती है।

और यह सही है जानवरों पर अत्याचार करना इंसानों का काम नहीं है। लेकिन एक बार गजब हो गई थी। इंसान भी इतना क्रूर हो सकता है इस बात का उदाहरण 13 सितंबर 1916 को हुई घटना से पता चलती है।

दरअसल यह मामला करीब 100 साल पुराना है। यानी कि 1916 की बात है। एक पार्क में एक सर्कस चलाया जाता था। सर्कस में 50 कुंटल वाली मेरी नाम की एक मादा हाथी भी थी। मेरी सर्कस का मुख्य आकर्षण थी।

मेरी अपने सुङ से लगभग 25 तरह के म्यूजिक निकालती थी। लेकिन किसी कारणवश इस मादा हाथी के केयरटेकर ने नौकरी छोड़ दी। जिसके जगह पर दूसरे व्यक्ति को इस जॉब पर रखा गया। आरती साल के इस व्यक्ति के पास घर नहीं था।

इस व्यक्ति ने मेरी को संभाला और हाथ में भाला भी पकड़ाया गया था। उसे समझाया गया था कि मेरी के कान पर धीरे से मारना है। एक बार डायरेक्टर ने सर्कस के प्रयोजन का सड़क पर आयोजन किया था। इस परेड में सभी जानवरों के साथ मेरी भी शामिल हुई थी।

नया व्यक्ति को जॉब को ज्वाइन किए हुए कुछ ही दिन हुए थे इसलिए मेरी को संभालना थोड़ा दिक्कत हो रही थी। उसे कुछ भी चीज का अनुभव नहीं था। इस परेड के दौरान मेरी तरबूज को खाने के लालच में आगे बढ़ रही थी। और वह व्यक्ति उसे रोकने के लिए बार-बार कान के पीछे वाला मार रहा था। मेरी इस हरकत से परेशान हो गई थी।

उसने सुङ उठाई और उस व्यक्ति को पकड़कर जमीन पर पटक दिया। उसके सिर पर लात रखकर कुचल दिया। वह व्यक्ति उसी वक्त मर गया और जिन लोगो ने इस घटना को देखा उसे हार्ट अटैक आ गया। इस घटना को देखकर दर्शक लोग भी चिल्लाते हुए भागे।

कुछ देर बाद सभी दर्शक ने हाथी को मार डालो, हाथी को मार डालो का नारा लगाने लगे। यह घटना आसपास के सभी शहरों में फैल गई। सभी दर्शक ने सर्कस के डायरेक्टर से निवेदन करते हुए हाथी को सजा की मौत सुनाने का आग्रह की। सभी लोगों ने धमकी दी कि अगर उसे सजा नहीं दी गई तो सर्कस शहर में होने नहीं देंगे।

सर्कस का मालिक एक बिजनेसमैन था उन्होंने सोचा कि एक हाथी की वजह से बिजनेस बंद करना ठीक नहीं। इसलिए उसने मेरी को मारने का फैसला लिया। लेकिन मालिक ने मेरी के मौत का तमाशा बनाने का मन बना लिया था। उन्होंने तय किया कि हाथी को फांसी की सजा दी जाएगी।

जब इंसान पर शैतान सवाल होता है तो ऐसी ही जुगाड़ दिमाग में आती है। आप सभी लोगों ने मेडी को मृत्युदंड देने के लिए सुझाव देना शुरू कर दिए। कुछ लोगों ने रेलवे स्टेशन पर मेरी को धीरे धीरे कुचलने की सुझाव दी। और कुछ लोगों ने करंट देकर मारने का सुझाव दिया।

आप जरा सोचिए एक तरफ हाथी और दूसरी तरफ पूरे शहर उस हाथी को मारने के लिए खड़ा था। 13 सितंबर को मेरी को क्रेन में लादकर दूसरे जगह पर ले जाया गया। वहां पर एक क्रेन को मंगवाई गई। जो लगभग 100 किलो का वजन उठा सकती थी।

मेरी को क्रेन से बांध दिया गया। उसके गर्दन में मोटी जंजीर लपेटी गई। फिर क्रेन ने उस मेरी को उठाया। मेरी ने बहुत जोर से चिल्लाई। दर्द से छटपटाते हुए मेरी सिर्फ 5 फीट ही ऊपर पहुंची थी कि चेन टूट गई। वह नीचे गिर गई और उसके पैर की हड्डी टूट गई।

लेकिन कोई इंसान इतना पढ़ भी नहीं माना दूसरे बारे में और मोटी चेन मंगवाई गई। फिर से उसके गर्दन में बांधे गए और फिर से क्रेन में उसे उठाया गया। आधे घंटे तक मेरी को लटका कर रखा गया। तब जाकर इस क्रूर इंसान को दिल की शांति मिली। फिर मेरी की मौत हो गई।