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रामायण से जुड़ा अद्भुत फ़ैक्ट, जरूर जानना चाहिए आपको, जिससे रामायण की प्रत्येक घटना के बारे मे पता चलता हैं

हैलो दोस्तों, जब रामायण जैसे कथा की बात आती है तो इसे लेकर लोगों के दिमाग में कई सारे सवाल उठते हैं। आज के एपिसोड में हम आप को रामायण से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताने वाले हैं इसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। फिर चाहे वो रामसेतु हो या फिर भगवान हनुमान के अस्तित्व। रावण के महल से लेकर लक्ष्मण जी को सुनाई जाने वाली जड़ी बूटी तक। सभी के फैक्ट्स आज आपको जानने के लिए मिलेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं:-

संजीवनी बूटी:- संजीवनी बूटी की चर्चाएं इतिहास काल से चली आ रही है। यह वही संजीवनी बूटी है जो लक्ष्मण जी को सुंघाया गया था। जहां पर लक्ष्मण जी को जड़ी-बूटी सुनाया गया था वहां पर संजीवनी बूटी के कुछ अंश मिले हैं। जबकि पूरे श्रीलंका में इस तरह के जड़ी बूटी पाई ही नहीं जाती।यह संजीवनी बूटी से हिमालय में पाई जाती है। हिमालय के जड़ी बूटी का श्रीलंका में पाया जाना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि यहां पर जरूर ये घटना हुई थी।

कोबरा हुड के श्रीलंका:- इस गुफा में माता सीता को असुरों द्वारा पकड़ कर रखा गया था। पुरातत्व विभाग वाले इस गुफा की जांच करके बताई है। इसका स्ट्रक्चर नेचुरली बनकर तैयार हुआ है इसमें किसी मानव का हाथ नहीं है। रामायण में इस गुफा का जिक्र करते हुए बताया गया है कि माता सीता को अगवा करके असुरों ने इसी गुफा में रखा था। इस गुफा में ऐसी चित्र बनी हुई है जो लाखों करोड़ों साल पुरानी है। यह तस्वीरें रामायण के पूरे चित्र को दर्शाती हैं।

लंका के जलने के अवशेष:- रामायण में हनुमान जी ने पूरी लंका में आग लगा दी थी। जिस वजह से पूरी लंका जलकर खाक हो गई थी। लंका के जलने के अवशेष मिल चुके हैं। शोधकर्ताओं ने जांच करने के बाद बताया है कि यहां की मिट्टी काली पड़ चुकी हैं। जिस जगह पर लंका थी वही के मिट्टी सिर्फ काली हुई है। बाकी उसके आसपास के इलाकों में ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिलता। यही सब चीजें रामायण के अस्तित्व को वैज्ञानिकों को सोचने पर मजबूर करती हैं।

रामसेतु:- दोस्तों हम सभी जानते हैं कि रामसेतु भारत और श्रीलंका के बीच बना एक पूल है। जो अभी भी मौजूद हैं। अगर हम रामायण की कथा की बात करें तो इसमें रामायण के अस्तित्व का प्रमाण दिया गया है। रामायण के कथा के अनुसार यह सेतु वानरो द्वारा बनाया गया था।

इसमें उन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है जो पानी के ऊपर करते हैं। हालांकि अब राम सेतु का इस्तेमाल नहीं किया जाता। वैज्ञानिकों ने इन पात्रों के बारे में बताया कि है पत्थर खास किस्म के धातु से बने हैं। जो आज से लाखों-करोड़ों साल पुराने हैं।

पानी में तैरने वाला पत्थर:- यह पत्थर विशालकाय होने के बावजूद पानी में डूबते नहीं थे। बल्कि ऊपर ही तैरते रहते थे। हालांकि सुनामी के बाद कुछ पत्थर तैरते हुए जमीन पर आ गए थे। इस पत्थर में कई सारे मटेरियल मौजूद हैं जो इस पत्थर को खास बनाती है।

तस्क हाथी:- दोस्तों रामायण में रखवाली के लिए यह विशालकाय हाथी का वर्णन किया गया है। लेकिन हैरानी वाली बात यह है कि श्रीलंका में इस हाथी के कुछ अवशेष मिले हैं। जिनका आकार आज के समय में पाए जाने वाले हाथी से काफी ज्यादा बड़ा है।

अशोक वाटिका:- माता सीता के अपहरण करने के बाद रावण ने अशोक वाटिका में रखा था। क्योंकि माता सीता रावण के महल में रहने के लिए तैयार नहीं थी। आपको बता दें कि यह जगह आज भी श्रीलंका में मौजूद है। आज के समय में जिस जगह पर सीता जी को रखा गया था उस जगह को सीता एलयन का जाता है।

भगवान हनुमान के पैरो के निशान:- दोस्तों कहा जाता है कि जब भगवान हनुमान माता सीता की खोज के लिए निकले थे तो एक लंबी सी छलांग मारी थी। छलांग मार के जिन पत्थरों पर हो पहन रखे थे उन पत्थरों पर पैर के निशान बन गए थे। जो आज भी यहां पर मौजूद हैं। वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि यह निशान आज के नहीं बल्कि लाखों करोड़ों साल पुराने हैं।

द्रोणागिरी पर्वत:- दोस्तों रामायण में युद्ध के दौरान जब लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया गया था और उनकी जान जाने वाले थे तभी हनुमान जी ने संजीवनी बूटी के लिए द्रोणागिरी पर्वत गए थे। हनुमान जी को संजीवनी की पहचान नहीं थी इसलिए उन्होंने द्रोणागिरी पर्वत को ही उठा लाए थे।युद्ध के बाद उस पर्वत को हनुमान जी ने वहीं पर लाकर रखा था। अगर पर्वत को देखा जाए तो उसमें आज भी निशान मौजूद हैं। जहां से हनुमान जी ने उस पर्वत को तोड़ा था। वहां के स्थानीय लोग इस पर्वत की पूजा करते हैं।

अग्नि परीक्षा:- माता सीता को रावण से बचाने के बाद भगवान राम ने उनकी पवित्रता साबित करने के लिए अग्नि परीक्षा ली थी। दोस्तों आज भी वह पर मौजूद है जिसके नीचे माता सीता ने अग्नि परीक्षा को दिया था। वहां के लोग आज भी इस पेड़ को पूजा करते हैं। पुरातत्व विभाग ने यह पुष्टि की है कि लाखों साल पहले श्रीलंका में घर हुआ करते थे। और रामसेतु के पत्थर भी उसी काल के हैं।

रावण का महल:- दोस्तो, पुरातत्व विभाग वालों को श्रीलंका में एक महल मिला है। जिस माहौल को रामायण काल का बताया जाता है। इस माह से कई सारे गुप्त रास्ते निकलते हैं। यह गुफाएं बहुत ज्यादा पुरानी है। जो हम इंसानों के अस्तित्व के बारे में सोचने पर मजबूर कर देती हैं।

हनुमान गढ़ी:- दोस्तों यह वही जगह है जहां पर भगवान हनुमान ने श्रीराम का इंतजार किया था। रामायण में इस बात को स्पष्ट रुप से लिखा गया है। इसलिए अयोध्या में जो कोई भी जाता है हनुमानगढ़ी का दर्शन जरूर करता है। रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान राम जब अयोध्या लौटे थे, तभी से भगवान हनुमान ने यहां पर रहना शुरू किया था। यही कारण है इस जगह का नाम हनुमान नगर है।

रामलिंगम:- यह वही शिवलिंग है जो भगवान राम ने खुद बनाया था। रामायण के कथा के अनुसार रावण को मारने के बाद राम को पश्चाताप करना पड़ा। क्योंकि उनके हाथ एक ब्राह्मण का कत्ल हुआ था। इसलिए उन्होंने शिव की आराधना की।

भगवान शिव ने उन्हें 4 शिवलिंग बनाने को कहें। एक शिवलिंग सीता जी ने बनाया जो कि रेत से बनकर तैयार हुआ था। दो शिवलिंग हनुमान जी कैलाश से लेकर आए थे। और एक शिवलिंग श्रीराम ने खुद अपने हाथों से बनाया था। जो आज भी उस मंदिर में देखने को मिलता है।

पंचवटी:- दोस्तों जब भगवान श्री राम को वनवास मिला था तो उन्होंने अयोध्या से लेकर श्रीलंका तक एक लंबी यात्रा की थी। नासिक के पास आज भी पंचवटी है। जहां अयोध्या से वनवास काटने के लिए निकलने वाले भगवान राम, सीता माता और लक्ष्मण रुके थे। यहीं पर लक्ष्मण ने सूर्पनखा की नाक काटी थी।