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दिलीप सिंह राणा कैसे बने द ग्रेट खली, जानिए उनके पूरे जीवनी के बारे मे…

दिलीप सिंह राणा कैसे बने द ग्रेट खली। दोस्तों गरीबी का आलम यह था कि रोज 15 किलोमीटर दूर चलकर व्यक्ति मजदूरी करने जाता था। पैसा मिलता था उससे उनकी जरूरत भी पूरी नहीं होती थी। मगर उस व्यक्ति में टैलेंट तो था। जरूरत है सिर्फ उनके गाइडेंस और सपोर्ट की थी। लेकिन दोस्तों दिलीप सिंह राणा की किस्मत जोरदार थी। उन्हें मार्गदर्शन भी मिला और समय पर सपोर्ट भी। जिसके बाद वह ग्रेट खली बन गए। आज के एपिसोड में हम आपको दिलीप सिंह राणा के कुछ जिंदगी के कुछ पहलुओं के बारे में बताएंगे।

द ग्रेट खली का नाम सुनते ही एक भारी-भरकम लंबे चौड़े दिलीप सुराणा की तस्वीर हमारे सामने आ जाती है। दिलीप सिंह राणा ने 10 दिसंबर 2006 में डब्ल्यूडब्ल्यूई में वर्ल्ड फेमस बने। पहली प्रतियोगिता में इन्होंने अपने दुश्मन को धूल चटा दी। 2007-8 में इन्होंने वर्ल्ड चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। उस समय द ग्रेट खली के नाम का खौफ हुआ करता था। उनकी ताकत के आगे सभी पहलवान उनके आगे सर झुकाते थे।

27 अगस्त सन 1972 में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में एक छोटे से गांव में पैदा हुए दिलीप सिंह राणा एक गरीब परिवार में पले बढ़े हैं। इनके पिता श्री ज्वाला राम और मां तानदी देवी हैं।

आज पूरे देश को इन पर नाज है। खली के परिवार में इनके बूढ़े माता-पिता के अलावा 6 भाई हैं। जो खली के कारनामों से फूले नहीं समाते। एक इंटरव्यू में छोटे भाई ने बताया कि पूरे परिवार को इन पर नाज है। इस गांव में कोई तो ऐसा पैदा हुआ जो पूरे देश में अपना नाम रोशन किया। खली के गांव में एक भी टीवी नहीं था।

दिलीप जब से पुलिस में भर्ती ले तब से उनकी फैमिली की इकोनामिक कंडीशन सुधर गई। फिर उनके परिवार के गाड़ी पटरी पर आ गई। फिलहाल ग्रेट खली का पूरा परिवार अपने पैतृक घर छोड़कर नैनीताल बस गया है। जहां खली ने अपना नया घर बनवाया है। इस घर में सभी लग्जरियस फैसिलिटी मौजूद है।

दिलीप सिंह के परिवार वाले बताते हैं कि जिस दिन टीवी पर उनकी फाइट आने वाली होती थी उस दिन खली के पिता ज्वाला राम और मां तानडी देवी टीवी चैनल नहीं देखते। क्योंकि वे अपने बेटे को मार खाते हुए नही देख सकते। मां तो उन की फाइट के दिन उपवास रखती है। और बेटे की सलामती की दुआ मांगती रहती है।

दिलीप सिंह राणा ने अपनी जवानी के दिन शिमला में बिताएं। जहां इन्होंने सबसे बिजी शहर में अपना 10 साल गुजारे हैं। उन्होंने वहां के तहसील गांव में पत्थर तोड़े हैं। जिसके बाद एक बिजनेसमैन कि इन पर नजर पड़ी, जो इनकी शरीर को देखकर काफी प्रभावित हुआ। फिर उसे अपने बॉडीगार्ड के तौर पर साल 1993 में अपने घर ले गया। इस समय दिलीप करीब 22 साल के थे। दो तीन व्यक्तियों का भोजन एक बार में ही कर लेते थे।

दिलीप खाने-पीने के काफी शौकीन थे। हालांकि उन्होंने अपने जीवन में काफी सारी कठिनाइयों का सामना किया है। मालिक ने एक विभाग में नौकरी दिलवाने के लिए दिलीप को रांची विभाग सरकार के पास ले गए थे। उस वक्त उन्हें दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती थी। उन्हें ना समझते हुए प्रदेश सरकार ने अपना ही हीरा ठुकरा दिया।

लेकिन पंजाब के पुलिस भुल्लर ने उनकी प्रतिभा को समझा और वहां उन्होंने दिलीप को सब इंस्पेक्टर के तौर पर तैनात किया। पढ़ाई-लिखाई अधिक ना होने के कारण उन्हें सपोर्ट में भर्ती किया गया। उन्होंने दसवीं की परीक्षा बाद में प्राइवेट से पास की। यह समय था 27 फरवरी 2005 का। जब हरविंदर कौर दिलीप के जीवन में उनकी पत्नी बन कर आई। उसके बाद दिलीप ने जापान जाकर अपने रेसलिंग में पैर आजमाएं। वहीं से फिर यह फेमस होते चले गए।

Disclaimer- इस एपिषोड की सामाग्री शोध पर आधारित हैं, और वेब, लेखो और समाचार पात्रो पर अध्ययन किया गया हैं। हम यह दावा नहीं देते हैं कि हमने जो जानकारी एकत्रित की हैं वह 100 प्रतिशत सटीक हैं। हमारी सामाग्री सिर्फ मनोरंजन के उद्धेश्य से हैं। हमारा इरादा किसी को चोट पहुंचाने का नहीं हैं।