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अपने मेहनत और लगन से भारत की पहली किन्नर जज बनी !

दोस्तों ये बात सभी जानते हैं की जब भी किसी के घर मिस्टर कोई किन्नर जन्म लेती हैं तो उसके लिए यह सारं की बात होती हैं। किन्नरो को लोग हर समय तिरस्कृत की दृष्टि से देखते हैं। आज मैं कुछ ऐसे ही कुछ घटना के बारे मे आपको बताने वाला हूँ।

समाज मे अपनी पहचान

एक ऐसी किन्नर जिन्होने अपने जीवन मे परेशानियों के बावजूद भी वह अपनी एक अलग ही पहचान बनाई और यह साबित भी कर दिया की किन्नर भी इंसनों जैसे ही होते हैं, उन्हे भी शिक्षा प्राप्त और अच्छी जीवन बिताने का हक होता हैं।

किन्नर जोइता मंडल

जिस किन्नर की हम बात कर रहे हैं उनका नाम हैं जोइता मंडल। जी हाँ दोस्तों जोइता मंडल एक किन्नर हैं इसके बावजूद भी वह जज बनकर एक इतिहास कायम किया हैं। यह भारत की पहली किन्नर जज हैं।

सारी संघर्षो को पार किया

इस किन्नर ने अपने जीवन मे काफी कठियाइओ का सामना किया और अपनी सफलता हासिल की। वर्तमान मे जोइता मंडल की उम्र 30 वर्ष हैं। वो पश्चिम बंगाल की रहने वाली हैं। उन्हे भारत की पहली किन्नर जज होने का खिताब भी मिल चूंका हैं।

समाज सेवा का काम

बताया जा रहा हैं ही वर्तमान ने जोइता समाज सेवा का काम किया करती थी। वो एक वृद्धा आश्रम चलती थी। उनके इस स्वभाव के कारण उन्हे सम्मानित भी किया और लोक अदालत का न्यायाधीश भी बनाया। जोइता ने बताया की एक समय ऐसा था जब उन्हे बस अड्डो पर या तो रेलवे स्टेशन पर रात गुजरना पड़ता था।

जोइता मंडल अपने आप को लड़का मानती रही

दरअसल जोइता बोलती हैं की 18 वर्ष होने तक वह अपने आप को लड़का ही मानती रही। लेकिन एक समय आया की जोइता को भी श्रृंगार करने का मन किया और वह ब्यूटी पार्लर चली गयी और पूरा श्रृंगार कर के घर आई।

गुस्से मे आए घर वाले

जब घर वालों को जोइता के बारे मे पता चला तो जोइता को घर वालों ने इतना मारा की 4दिनों तक बिस्तर से उठ नहीं प रही थी इतना ही नहीं जोइता का डॉक्टर से इलाज भी नहीं करवाया। जोइता का यह भी कहना हैं की जब वह स्कूल जाती थी तो सब उसका बहुत मज़ाक उड़ते थे।

अपना घर छोड़ा

सान 2009 मे जोइता ने अपना घर छोड़ दिया। उन्होने किन्नरो के स्थान पर जा कर रहने लगी थी। वह बाकी किन्नरो की तरह सारा काम किया करती थी।

दूसरों की हक के लिए लड़ाई

जोइता दूसरों की हक के लिया लड़ा करती थी। वो अपने जीवन मे और आगे बढ़ना चाहती थी। एक समय ऐसा आया की वो अपने मेहनत से 8 जुलाई 2017 को राज्य सरकार द्वारा लोक अदालत का जज घोषित कर दिया गया और उनका नाम इतिहास के पन्नो पर हमेशा के लिए छाप दिया गया।