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मिलिये भारत के 6 सिंघम से, जिनसे भारत के सभी गुंडे डरते हैं…

दोस्तों क्या आपको पता है कि इस देश में एक ऐसा पुलिस वाला भी है जो सिंघम से भी खतरनाक है। फिल्म के राउडी राठौर से भी अधिक पुलिस वालों ने आतंक फैला रखा है। फिल्म में पुलिस को देखते ही आप सोचते होंगे कि हमारे देश की पुलिस ऐसी क्यों नहीं होती। जिसे देख कर मुजरिम थरथर कांपने लगे। आज हम आपको ऐसी पुलिस के बारे में बताएंगे जिस का दबदबा पूरी पुलिस थाने में है। तो चलिए शुरू करते हैं:-

MOTILAL DYAMA:- सिर्फ 27 साल की उम्र में मोतीलाल मध्य प्रदेश में कार्यरत हैं। उनकी फिटनेस पर इंदौर के लिए मिसाल है। उन्हें बचपन से बॉडीबिल्डर का शौक था, इसलिए वो इंदौर में चार बार बॉडीबिल्डर का खिताब अपने नाम कर चुके हैं। मोतीलाल से प्रेरित होकर कई अफसर जिम जाने लगे हैं। मोतीलाल को अपनी फिटनेस को कायम रखने के लिए 1 महीने में ₹ 1 लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं।

RUBEL DHANKAR:- रूबल धनकर दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल पद पर कार्यरत हैं। इन्हे भी बॉडी बिल्डिंग का बहुत शौक है यह अपने ड्यूटी पर जाने के साथ-साथ जिम जाना नहीं भूलते। रूबल अपने पुलिस डिपार्टमेंट के साथ-साथ पूरे देश में कामयाबी हासिल की। सोशल मीडिया पर इनके लाखो फॉलोअर हैं। इन्होंने भी एक यूट्यूब चैनल बना रखा है जो अपने फैंस के लिए फिटनेस का वीडियो लेकर आते हैं। यहां अपने फिटनेस के कारण पूरे पुलिस विभाग में अलग पहचान रखते हैं।

SACHIN ATULKAR:- भोपाल के सचिन अतुलकर सबसे युवा IPS में से एक है। यह मात्र 22 साल की उम्र में आईपीएस ऑफिसर बन गए थे। सचिन को भी हमेशा से बॉडी बिल्डिंग का शौक रहा है। मैं आईपीएस बन कर देश की सेवा करते हुए और साथ में घंटों बाद जिम में कसरत भी करते हैं। इस पुलिस अफसर का वजन 80 किलो है। बॉडी बिल्डिंग के अलावा इन्हें क्रिकेट और घुड़सवारी का बहुत शौक है। वे इन खेलों में कई सारे स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुके हैं।.

KISHORE DANGE:- महाराष्ट्र के किशोर दांगी का नाम पूरे भारत में प्रसिद्ध है। उनको भी हमेशा से बॉडी बिल्डिंग का शौक था। उनका जिला महाराष्ट्र के एक गरीब परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर महाराष्ट्र के कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए। कांस्टेबल बनने के बाद किशोर ने बॉडीबिल्डिंग की काम शुरू कर दी। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने देश-विदेश में अपनी प्रतियोगिता जीती। अब उनका सपना है देश में स्वर्ण पदक जीताना, इसके लिए वह करी मेहनत कर रहे हैं। इनका फिटनेस पूरे युवाओं के लिए प्रेरणा है।

TEJINDER SINGH:- देहरादून के तेजेंद्र सिंह उत्तराखंड के पुलिस कांस्टेबल में कार्यरत है। तेजिंद्र सिंह का सपना बॉडी बिल्डर बनने का था। इन्होंने अपने मेहनत के बल पर कोई साड़ी प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम कर चुके हैं। उन्होंने पहली बार साल 2011 में बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उन्हें प्रथम पांच प्रतियोगियों में शामिल किया गया। इसके बाद तेजिंदर एक के बाद एक प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम करते चले गए।

AMIT CHETRI:- अमित छेत्री उत्तराखंड में ASI के पद पर कार्यरत हैं। अमित भी शुरू से बॉडी बिल्डिंग करना चाहते थे। पुलिस विभाग के भर्ती के बाद इन्होंने बॉडीबिल्डिंग से नाता नहीं तोड़ा। उन्होंने साल 2011 में मिस्टर इंडिया बॉडीबिल्डर के स्वर्ण पदक जीतकर देश में नाम रोशन किया। एक के बाद एक प्रतियोगिता जीतकर इन्होंने पूरे देश का नाम विदेशों में भी रोशन कर दिया। इनका कहना है कि टाइम मैनेजमेंट से सब कुछ पॉसिबल हो जाता है।