अजब गजब

चाँद पर आखिर कैसे होती है उल्टी बारिश !

दुनिया के तमाम अंतरिक्ष एजेंसी ब्रह्मांड में तमाम रहने लायक मुमकिन जगह को तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। यह घटना 22 अक्टूबर 2008 की है। जब भारत देश के ही सतीश धवन स्पेस सेंटर ने एक अंतरिक्ष यान को चंद्रमा के तरफ भेजा।

अंतरिक्ष यान का नाम था चंद्रयान-1. चंद्रमा की धरती पर पहुंचते ही भारत ने ऐसी खोज कर दी की पूरी दुनिया हैरान हो गई।

22 अक्टूबर 2008 का यह दिन बहुत ही खास दिन था। जब भारत ने अंतरिक्ष में अपना चंद्रयान भेजा। इसके बाद भारत पूरी दुनिया में चौथा ऐसा देश बन गया जिसने चांद पर पहुंच कर अपनी कामयाबी हासिल की हो।

चंद्रयान ने एक ऐसी खोज कर दी कि पूरी दुनिया हैरान रह गई। जिसका पता दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने 50 सालों में भी नहीं लगा पाई। और वह जानकारी थी चंद्रमा की सतह पर भी पानी है। और वहां भी बारिश होती है।

1960 के दौर में अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने सबसे पहले इंसान को चांद पर भेजने की योजना बनाई थी। 1969 से लेकर 1972 ईस्वी के बीच तक नासा ने पांच बार इंसान को चंद्रमा पर भेज चुका है।

अब तक कई वैज्ञानिकों का मानना था कि चांद पर भी पानी मौजूद हो सकता है। लेकिन भारत के ISRO एजेंसी ने साल 2008 में चंद्रयान-1 को चंद्रमा पर भेजा । उसी समय पता चला कि चांद के दोनों पोल्स में पानी के भंडार हैं।

हिंदुस्तान की एजेंसी की है खोज समुंदर में मिले किसी खजाने से कम नहीं था। 2009 में चांद पर पानी मिलने का सबूत पक्का हो गया। अंतरिक्ष में पानी की खोज किसी हीरो से कम नहीं थे।

2013 ईस्वी में नासा ने एक मिशन लॉन्च किया और इस मिशन के द्वारा उन्हें चंद्रमा पर वायुमंडल के बारे में पता लगाना था। इसके दौरान पता चला कि चंद्रमा पर बिल्कुल ना के बराबर वायुमंडल है। और ना ही चंद्रमा पर कोई आसमान मौजूद है।

उल्का पिंड जब चांद से टकराता है तो उससे बहुत सारी ऊर्जा उत्पन्न होती है, इसी टकराव के कारण पानी है जो तेज रफ्तार से सतह से बाहर आ जाता है। चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल कम होने की वजह से पानी सीधा अंतरिक्ष में चला जाता है। इसी प्रक्रिया के कारण लगता है कि चंद्रमा पर उल्टी बारिश होती है।

यहां पर पानी आसमान से जमीन की तरफ नहीं जमीन से आसमान की तरफ बढ़ता है।

चंद्रमा पर उपस्थित यह पानी बहुत ही कम मात्रा में है। अगर चंद्रमा पर आपको एक कप पानी की जरूरत होगी तो आप को चंद्रमा की सतह को 900 मीटर नीचे तक जाना पड़ेगा।

इंसान लंबे समय से इस खोज में जुटा हुआ है कि पृथ्वी की तरह ब्रह्मांड में और कोई भी ग्रह मौजूद है या नहीं। जहां इंसानों को रहने लायक हो।

आने वाले समय में ISRO और भी चंद्रयान को चंद्रमा पर भेजने की योजना बना रहा हैं। साल 2019 में ISRO ने चंद्रयान को चंद्रमा पर उतरने की कोशिश की थी, लेकिन यह सफल नहीं हो पाई।

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